
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद हज़ारों वोटरों के ब्योरे चुपचाप बदल दिए गए। जांच में 10,470 मंज़ूर एंट्री में से हर एक में गड़बड़ी मिली। अब दो SDM और एक कंप्यूटर ऑपरेटर पर FIR दर्ज हुई है, और 10 अप्रैल के बाद जोड़े और हटाए गए हर नाम की दोबारा जांच हो रही है।
यह मामला पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र (संख्या 127) का है। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा ने 22 अक्टूबर 2026 को इसकी जानकारी दी। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद यहां की अंतिम मतदाता सूची 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित हो चुकी थी।
गड़बड़ी पकड़ में कैसे आई
- शिकायत मिली कि कुछ EPIC नंबर (वोटर ID नंबर) ऑनलाइन खोजने पर किसी और मतदाता का नाम और ब्योरा दिख रहा है।
- जांच में पता चला कि मतदाता पंजीकरण केंद्र (VRC) के एक कंप्यूटर सहायक ने 31 मई से 29 अगस्त 2026 के बीच 13,779 फॉर्म-8 सिस्टम में दर्ज किए। फॉर्म-8 मतदाता के ब्योरे में सुधार या बदलाव के लिए भरा जाता है।
- इनमें 4,717 आवेदन 16 जुलाई तक और 9,062 आवेदन 17 जुलाई से 29 अगस्त के बीच दर्ज हुए।
- दफ्तर में इन आवेदनों का कोई भौतिक फॉर्म या रिकॉर्ड नहीं मिला।
- 13,779 में से 10,470 आवेदन मंज़ूर हुए और 3,309 खारिज। मंज़ूर हुई सभी 10,470 एंट्री में गड़बड़ी पाई गई।
किन पर कार्रवाई हुई
| अधिकारी | भूमिका | कार्रवाई |
|---|---|---|
| मयंक गोस्वामी, SDM पूरनपुर | निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) | FIR, ज़िला मुख्यालय से संबद्ध, विभागीय कार्यवाही |
| हेमंत चौधरी, SDM अमरिया | निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) | FIR, ज़िला मुख्यालय से संबद्ध, विभागीय कार्यवाही |
| अनिल कुमार | कंप्यूटर ऑपरेटर | FIR, सेवा से हटाए गए |
FIR सहायक ज़िला निर्वाचन अधिकारी की ओर से दर्ज कराई गई है। इसमें लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराएं लगाई गई हैं। सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (AERO) की भूमिका की भी जांच हो रही है।
धारा 32 क्या है: मतदाता सूची तैयार करने या उसमें सुधार से जुड़ा कोई अधिकारी बिना उचित कारण के अपने कर्तव्य का उल्लंघन करे, तो उसे कम से कम 3 महीने और अधिकतम 2 साल तक की कैद और जुर्माने की सज़ा हो सकती है।
अब आगे क्या होगा
- 10 अप्रैल से 21 अक्टूबर 2026 के बीच दर्ज हुए सभी फॉर्म-6 (नाम जोड़ना) और फॉर्म-7 (नाम हटाना) की दोबारा जांच के आदेश दिए गए हैं। इसकी रिपोर्ट एक दिन में मांगी गई है।
- गलत तरीके से बदले गए फॉर्म-8 ब्योरों को ठीक करने का काम शुरू हो गया है।
- पीलीभीत के ज़िलाधिकारी आलोक कुमार की निगरानी में जांच चल रही है।
विपक्ष के आरोप
कांग्रेस ने 21 अक्टूबर को आरोप लगाया कि 13,150 मतदाताओं के नाम बदल दिए गए, जबकि उनके EPIC नंबर और क्रम संख्या वही रहे। टीवी9 भारतवर्ष की रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस ने 804 नाम हटाने, करीब 2,600 नाम जोड़ने और कुल 16,554 एंट्री प्रभावित होने का भी आरोप लगाया। समाजवादी पार्टी ने भी ऐसी ही चिंता जताई है।
ध्यान दें: 10,470 एंट्री में गड़बड़ी का आंकड़ा निर्वाचन विभाग का आधिकारिक आंकड़ा है। 13,150 और 16,554 जैसे आंकड़े राजनीतिक दलों के आरोप हैं, जिनकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
यह मामला क्यों अहम है
- अंतिम सूची के बाद बदलाव: SIR के बाद प्रकाशित सूची को सबसे साफ माना जाता है। उसके बाद बिना कागज़ के हज़ारों बदलाव होना पूरी प्रक्रिया की निगरानी पर सवाल उठाता है।
- EPIC वही, आदमी अलग: अगर आपके वोटर ID नंबर पर किसी और का नाम दर्ज हो जाए, तो मतदान के दिन आपको वोट डालने में दिक्कत हो सकती है।
- ज़िम्मेदारी तय हुई: इस मामले में सिर्फ ऑपरेटर नहीं, सूची को मंज़ूरी देने वाले ERO पर भी कार्रवाई हुई है।
अपना नाम और ब्योरा कैसे जांचें
- electoralsearch.eci.gov.in पर जाकर अपने EPIC नंबर से खोजें और देखें कि नाम, उम्र, पता और फोटो सही हैं या नहीं।
- गलती मिले तो voters.eci.gov.in या Voter Helpline ऐप से फॉर्म-8 भरें, या अपने बूथ लेवल अधिकारी (BLO) से मिलें।
- नाम गायब हो तो फॉर्म-6 से दोबारा जुड़वाएं। किसी गलत नाम पर आपत्ति के लिए फॉर्म-7 है।
- शिकायत के लिए निर्वाचन आयोग की हेल्पलाइन 1950 पर कॉल करें।
स्रोत
- Hindustan Times: Pilibhit voter roll discrepancies, FIR against 2 SDMs, computer operator
- The Hindu: Legal action ordered against officials over irregularities in voter list in Pilibhit
- The Indian Express: Pilibhit voter list irregularities probe
- The Wire: FIR against two SDMs, computer operator over 10,470 entries
- PTI / News18: Glitches in over 10,000 voter entries in UP’s Pilibhit
- आजतक: पीलीभीत SIR मामले में दो SDM और कंप्यूटर ऑपरेटर पर FIR
- टीवी9 भारतवर्ष: पीलीभीत वोटर लिस्ट गड़बड़ी
यह लेख उपलब्ध समाचार रिपोर्टों और निर्वाचन विभाग के बयान पर आधारित है। जांच जारी है; आरोपियों का दोष अदालत में साबित होना बाकी है।
