
दिल्ली में मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण, यानी SIR, चल रही है। मसौदा सूची में जिनके नाम नहीं हैं, उनमें एक बड़ी श्रेणी ASDD है: अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या दोहरा नाम। ओखला की दो बूथों पर नागरिक संगठनों के एक सार्वजनिक ऑडिट ने कहा है कि कम से कम 100 ऐसे मतदाता अब भी उसी पते पर रहते हैं, फिर भी उनका नाम इस सूची में डाल दिया गया।
यह चुनाव आयोग का स्वीकारोक्ति नहीं है। यह द हिंदू द्वारा रिपोर्ट किया गया नागरिक ऑडिट है। ऑडिट जन सरोकान, मजदूर किसान शक्ति संगठन, वोटर अधिकार मंच और नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वीमेन ने किया। सात दिनों में 258 घरों को देखा गया। 18 अक्टूबर 2026 को बटला हाउस में जनसुनवाई हुई। द हिंदू के मुताबिक इन सौ में से 99 मामले ASDD के थे। दशकों से उसी पते पर रहने वाले लोगों ने कहा कि उन्हें लापता, अनुपस्थित या हमेशा के लिए शिफ्ट दिखाया गया है, और अब रास्ता नया नाम दर्ज कराने का फॉर्म 6 है।
सूची से नाम कैसे गायब होता है
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक SIR से पहले दिल्ली में करीब 1.45 करोड़ मतदाता थे। 31 अगस्त को छपी मसौदा सूची में 97.5 लाख नाम रहे। करीब 47.5 लाख को बूथ स्तर अधिकारी नहीं मिल सके, या वे अनुपस्थित, शिफ्ट, मृत या दोहरे नाम की श्रेणी में पड़े, और मसौदे से हट गए। ओखला उन क्षेत्रों में है जहां मसौदे में कटाव ज्यादा बताया गया।
मसौदे में जो नाम बचे भी, उनमें से करीब 33.1 लाख को नोटिस मिला। इनमें 13.79 लाख वे थे जो पिछली SIR सूची से अपना नाम नहीं जोड़ सके, और 19.33 लाख पर फॉर्म में तार्किक विसंगति बताई गई। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के दफ्तर के मुताबिक इनमें से करीब 26 लाख मामले निपटाए जा चुके हैं।
अभी आखिरी तारीख क्या है
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी का 17 अक्टूबर 2026 का प्रेस नोट कहता है कि दावे और आपत्तियां 31 अगस्त से 30 अक्टूबर 2026 तक हैं। योग्य मतदाता छूटना नहीं चाहिए, यह लिखा लक्ष्य है। मसौदा सूची से कोई नाम बिना सुनवाई के नहीं काटा जाएगा।
प्रेस नोट के आंकड़े: नोटिस और विसंगति के 33,12,919 मामलों में से करीब 26 लाख निपट चुके हैं। दावा-आपत्ति की अवधि में 2,32,514 फॉर्म 6 आए हैं। मसौदा छपने से पहले भी 2,12,400 फॉर्म 6 आए थे। 18 और 25 अक्टूबर को बूथों पर विशेष कैंप हैं। हेल्पलाइन 1950 है। फॉर्म voters.eci.gov.in पर और ECINET ऐप पर भरा जा सकता है। कागज का फॉर्म बूथ स्तर अधिकारी, सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी या मतदान केंद्र पर भी दिया जा सकता है। प्रेस नोट कहता है कि कागज का फॉर्म लौटाया नहीं जाएगा और दो दिन में डिजिटल किया जाएगा।
14 अक्टूबर के आदेश के बाद बूथ स्तर अधिकारियों से कहा गया है कि ASDD सूची के हर नाम की दोबारा जांच करें। अगर अनुपस्थित या शिफ्ट दिखाया गया व्यक्ति उसी पते पर मिलता है, तो उससे फॉर्म 6 भरवाया जाए। इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा कि कई अधिकारियों को यह निर्देश व्हाट्सऐप पर मिला है, लिखित आदेश हर जगह नहीं पहुंचा था। फॉर्म 6 भरने की आखिरी तारीख को लेकर एक्सप्रेस ने 31 अक्टूबर लिखा है। आधिकारिक प्रेस नोट 30 अक्टूबर कहता है। फॉर्म देते समय 30 अक्टूबर को आखिरी दिन मानकर चलना सुरक्षित है।
नाम गलत कटा हो तो क्या करें
पहले अपना नाम मसौदा सूची में खोजें। ASDD सूची दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की साइट पर है। EPIC नंबर से देखा जा सकता है। नाम नहीं है और आप उसी पते पर रहते हैं, तो फॉर्म 6 के साथ घोषणा और वे कागजात दें जो आयु और पते का सबूत हों। फॉर्म 7 किसी और के नाम पर आपत्ति के लिए है। फॉर्म 8 पता बदलने, गलती सुधारने या नया कार्ड बनवाने के लिए है।
रसीद रखें। फॉर्म लौटाया जाए तो लिखित में कारण पूछें। प्रेस नोट के मुताबिक तुच्छ कारण से फॉर्म खारिज नहीं होना चाहिए। जिला या विधानसभा के हेल्प डेस्क पर भी शिकायत जा सकती है। 30 अक्टूबर के बाद दावे की खिड़की प्रेस नोट के कार्यक्रम के हिसाब से बंद हो जाती है। अंतिम सूची दिसंबर में आने वाली है। इंडियन एक्सप्रेस ने अंतिम SIR सूची की तारीख 4 दिसंबर लिखी है।
ओखला का ऑडिट पूरे दिल्ली का आंकड़ा नहीं है। वह दो बूथों की जांच है। पर रास्ता वही है जो बाकी छूटे हुए मतदाताओं के लिए खोला गया है: घर पर दोबारा जांच, और योग्य व्यक्ति से फॉर्म 6।
यह कानूनी सलाह नहीं है। अपना नाम voters.eci.gov.in पर खुद जांचें।
