
रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को शाम करीब सात बजे मुंबई के जुहू में अभिनेता टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर फायरिंग हुई। वे पुष्पा नरसी पार्क से फुटबॉल खेलकर निकल रहे थे। मुंबई पुलिस के हवाले से इकोनॉमिक टाइम्स ने लिखा है कि गोली टाइगर को नहीं लगी। घायल हुए दो लोग, जिनमें उनके ड्राइवर फिरदौस भी हैं। कुछ रिपोर्टों में इस नाम की वर्तनी Firdosh भी है।
यह पोस्ट प्रकाशित रिपोर्टों का ब्यौरा है। किसी गिरोह या व्यक्ति को इस लेख में दोषी नहीं ठहराया गया है।
FIR में कौन सी धाराएं हैं
मुंबई पुलिस ने तीन अनजान लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। इकोनॉमिक टाइम्स ने एएनआई के हवाले से धाराएं बताई हैं: भारतीय न्याय संहिता की धारा 109(1) और 3(5), तथा आयुध अधिनियम, 1959 की धारा 3 और 25।
धारा 109(1) हत्या के प्रयास की है। यह पुरानी दंड संहिता की धारा 307 की जगह है। अगर काम ऐसा था कि मौत हो जाती तो आरोप हत्या का बनता, तो प्रयास पर दस साल तक की कैद और जुर्माना हो सकता है। अगर इस प्रयास में किसी को चोट आई हो, तो सजा उम्रकैद तक जा सकती है। ड्राइवर को गोली लगी है, इसलिए चोट वाली कड़ी इस केस में मायने रखती है। यह सजा तभी बनती है जब अदालत इरादा और वारदात दोनों सिद्ध करे।
धारा 3(5) साझा इरादे की है। पुरानी धारा 34 की तरह, जब कई लोग एक इरादे से काम करते हैं तो हर व्यक्ति उस काम के लिए उसी तरह जिम्मेदार माना जा सकता है जैसे उसने अकेले किया हो। पुलिस ने इसे इसलिए जोड़ा है क्योंकि हमलावर एक से ज्यादा बताए गए हैं।
आयुध अधिनियम की धारा 3 कहती है कि बंदूक रखने के लिए लाइसेंस चाहिए। धारा 25 बिना लाइसेंस हथियार रखने या इस्तेमाल करने की सजा है। फायरिंग के केस में ये धाराएं हत्या के प्रयास के साथ लगती हैं।
क्या हुआ, किसके मुताबिक
डीसीपी मोहित गर्ग के हवाले से इकोनॉमिक टाइम्स ने लिखा कि फायरिंग पार्क से गाड़ी में बैठकर निकलते समय हुई। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक पुलिस का कहना है कि पांच राउंड चले। ड्राइवर के बाएं हाथ में गोली लगी। गाड़ी के पास खड़ा एक और व्यक्ति भी घायल हुआ। दोनों को अस्पताल ले जाया गया। हमलावर मोटरसाइकिल से एसवी रोड की तरफ भागे और बाइक अंधेरी पश्चिम स्टेशन के बाहर छोड़ गए। दो संदिग्धों की सीसीटीवी तस्वीरें पुलिस के पास हैं। पंद्रह टीमें लगी हैं। केस क्राइम ब्रांच को जाने की संभावना बताई गई है।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे रात में श्रॉफ के घर गए। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि टाइगर के हाथ पर बारूद और कांच के टुकड़ों से चोट है, गोली नहीं लगी, और राज्य सरकार परिवार की सुरक्षा करेगी। तस्वीरों में कंधे और छाती पर ड्रेसिंग तथा एक बांह पर पट्टी दिखी। शिंदे ने चोट बाएं हाथ की बताई। तस्वीरों के वर्णन में दाईं बांह की पट्टी भी है। चोट किस हाथ पर है, यह पुलिस के मेडिकल पेपर से साफ होगा।
सोशल मीडिया पर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े बताए गए एक पोस्ट में जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया। इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि पुलिस ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है, और श्रॉफ की तरफ से पहले किसी धमकी की शिकायत दर्ज नहीं थी। जब तक पुलिस इस पोस्ट को वारदात से जोड़े, इसे दावा ही पढ़ें।
गिरफ्तारी को लेकर रिपोर्टें एक नहीं हैं। द हिंदू की शुरुआती सुर्खी में एक संदिग्ध के हिरासत में होने का जिक्र है। इंडियन एक्सप्रेस ने बाद में लिखा कि उस समय किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया था। आधिकारिक स्थिति पुलिस के अगले बयान से देखें।
पढ़ने वाले के लिए सीधी बात
किसी सार्वजनिक व्यक्ति पर फायरिंग अपने आप किसी गिरोह का सबूत नहीं होती। FIR में नाम अनजान हैं। सीसीटीवी, बाइक, ड्राइवर का बयान और फॉरेंसिक अभी जांच का सामान हैं। अदालत में केस धारा 109 पर तभी टिकेगा जब गोली चलाने वाले का इरादा हत्या का साबित हो। चोट का इलाज और गवाह का बयान उसी सवाल का हिस्सा हैं।
यह कानूनी सलाह नहीं है। आरोप सिद्ध होने से पहले किसी व्यक्ति या गिरोह को दोषी न मानें।
