
कर्नाटक में कम से कम 61,059 फॉर्म-7 आवेदन खुद निर्वाचन अधिकारी भर रहे हैं, और द हिंदू की 26 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से एक में भी नाम हटाने की वजह नहीं लिखी गई। फॉर्म-7 वही फॉर्म है जिससे मतदाता सूची से किसी नाम पर आपत्ति या उसे हटाने की मांग दर्ज होती है। वजह लिखना रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960 के तहत ज़रूरी है।
ये आवेदन निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) के नाम पर दर्ज हैं। यानी आपत्ति उठाने वाला और उस आपत्ति पर फैसला करने वाला, दोनों तरफ़ वही चुनाव मशीनरी है। यह मामला उत्तर प्रदेश के पीलीभीत वाले वोटर-लिस्ट मामले से अलग है। वहाँ बिना रिकॉर्ड फॉर्म-8 में बदलाव की बात थी। यहाँ सवाल फॉर्म-7 का है, और आंकड़ा कर्नाटक के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का है।
अधिकारी क्या कह रहे हैं
- अधिकारियों के मुताबिक, जब “नो मैपिंग” या तार्किक गड़बड़ी की नोटिस पर बुलाई गई सुनवाई में वोटर तक पहुँच नहीं बनी, तो सिस्टम ने उन्हें अयोग्य (ineligible) चिह्नित कर दिया।
- उसी वक्त सिस्टम ने उनके डिजिटल हस्ताक्षर के साथ फॉर्म-7 अपने आप बना दिया।
- उन्हें हिदायत थी कि वोटर के स्थायी रूप से चले जाने, दूसरी जगह डुप्लीकेट एंट्री, कम उम्र, मृत्यु, या भारतीय नागरिक न होने पर फॉर्म-7 भरें।
- फॉर्म अपने आप बना, इसलिए हटाने की वजह खाली रह गई।
बिना वजह के न तो वोटर समझ सकता है कि उसका नाम क्यों काटा जा रहा है, और न कोई बाहर से जाँच कर सकता है कि हटाना जायज़ था या नहीं।
ये नाम पहले ही एक बार छँट चुके थे
अनुपस्थित, स्थानांतरित, डुप्लीकेट, मृत और अन्य (ASDDO) श्रेणियों की जाँच SIR की गणना के दौर में हो चुकी थी। उसी दौर में कर्नाटक की प्रारूप मतदाता सूची से 1.07 करोड़ से ज़्यादा नाम हटे। सबसे ज़्यादा हटाने की वजह स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाना थी, उसके बाद अनुपस्थित होना।
आपत्ति की समय-सीमा के बाद तेज़ी
दावे और आपत्ति की अवधि 23 सितंबर 2026 को खत्म हो गई। द हिंदू के मुताबिक उसके बाद भी अधिकारियों के फॉर्म-7 तेज़ी से बढ़े।
| अवधि | अधिकारियों के फॉर्म-7 |
|---|---|
| 24 अगस्त से 23 सितंबर 2026 | 192 |
| 24 सितंबर से 22 अक्टूबर 2026 | 60,800 से ज़्यादा |
| 17 अक्टूबर 2026 | 11,132 |
| 19 अक्टूबर 2026 | 11,760 |
| 21 अक्टूबर 2026 | 10,314 |
| 22 अक्टूबर 2026, निपटारे का आखिरी दिन | 10,105 |
जिन नामों की जाँच हुई, वे सूची से हट चुके थे
- द हिंदू ने कुछ वोटरों के EPIC नंबर लिए, जिनके खिलाफ अधिकारियों ने फॉर्म-7 दायर किया था, और उन्हें चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाँचा।
- जाँचे गए सभी मामलों में नाम मतदाता सूची से पहले ही हट चुका था, जिनमें 23 सितंबर के बाद दायर आवेदनों के नाम भी शामिल थे।
- यह एक नमूना जाँच है, पूरी सूची का ऑडिट नहीं। फिर भी यह नियम 17 से टकराता दिखता है।
रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960 का नियम 17 कहता है कि जो दावा या आपत्ति तय समय में, या तय फॉर्म और तरीके से नहीं आई, उसे रजिस्ट्रेशन अधिकारी रद्द करेगा। नियम यह भी माँगता है कि हटाने से पहले सुनवाई का नोटिस और आदेश हो। इन फॉर्म-7 में वजह खाली होने से यह साफ नहीं है कि नोटिस और आदेश जारी हुए या नहीं।
कहाँ अधिकारियों के फॉर्म, वोटरों से ज़्यादा थे
- बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (BBMP) साउथ ज़िला में अधिकारियों ने सबसे ज़्यादा फॉर्म-7 भरे। यहाँ कुल 17,491 आवेदनों में से 10,374 अधिकारियों के थे। वोटरों या तीसरे पक्ष के आवेदनों से ज़्यादा।
- सिर्फ बोम्मनहल्ली विधानसभा में 5,757 आवेदनों में से 4,095 अधिकारियों ने भरे।
- कम से कम 26 विधानसभा क्षेत्रों में ERO और AERO के फॉर्म, वोटरों या तीसरे पक्ष से ज़्यादा थे।
अंतिम सूची 27 अक्टूबर को छपनी है
कर्नाटक की अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित होने वाली है। नियम के मुताबिक अंतिम सूची में सिर्फ वे दावे और आपत्तियाँ गिनी जानी थीं जो 23 सितंबर तक आ गई थीं। उसके बाद के आवेदन SIR के बाद की पूरक सूची के लिए थे। द हिंदू की नमूना जाँच में समय-सीमा के बाद वाले कुछ नाम भी सूची से हट चुके मिले।
एक और गिनती का फर्क है। 24 सितंबर से 22 अक्टूबर के बीच मुख्य निर्वाचन अधिकारी के दफ्तर ने 1,70,442 फॉर्म-7 बताए। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर समेकित फॉर्म-10 रिकॉर्ड में इसी अवधि के 1,56,634 आवेदन दिखे। फर्क 13,808 का है। द हिंदू पहले भी लिख चुका है कि वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ा, मुख्य निर्वाचन अधिकारी के बयानों से कम रहता आया है। इसलिए 61,059 भी न्यूनतम आंकड़ा है। असल संख्या ज़्यादा हो सकती है।
अपना नाम कैसे जांचें
- electoralsearch.eci.gov.in पर EPIC नंबर या नाम से देखें कि नाम, उम्र, पता और फोटो अभी सूची में हैं या नहीं।
- नाम गायब हो या ब्योरा गलत हो तो voters.eci.gov.in या वोटर हेल्पलाइन ऐप से फॉर्म भरें, या अपने बूथ लेवल अधिकारी (BLO) से मिलें। नया नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6, ब्योरा सुधारने के लिए फॉर्म-8, और गलत नाम पर आपत्ति के लिए फॉर्म-7 है।
- शिकायत के लिए निर्वाचन आयोग की हेल्पलाइन 1950 है।
स्रोत
- The Hindu, 26 अक्टूबर 2026: Over 61,000 Form-7 applications filed by election officials in Karnataka, none cites reason
- The Hindu Morning Digest, 26 अक्टूबर 2026
यह लेख द हिंदू की रिपोर्ट पर आधारित है। अधिकारियों का यह बयान है कि फॉर्म सिस्टम ने अपने आप बनाए। किसी अधिकारी पर अदालत में दोष साबित होने की बात इस रिपोर्ट में नहीं है। अंतिम सूची 27 अक्टूबर को प्रकाशित होनी है।
